Thursday, September 1, 2016

31.ज़िन्दगी


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जिंदगी 
मैंने तुझको हर राह,हर गुलिस्तां में ढूँढा,
सुर्ख पत्तों की सरसराहट में 
महसूस किया था तुमको |
था कहाँ इल्म मुझे,
मेरे दामन से तुम युहीं सरक जाओगी |
बस इतनी सी गुज़ारिश है ,
आयन्दा आना तो,
मेरे दरवाज़ों पर दस्तक् देना....

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