Monday, October 10, 2011

13.आओ हमतुम साथ चलें





पँचीसवी सालगिरहआओ हमतुम साथ चलें




हमदोनो कों एक साथ बँधे

एक जमाना(२५ साल)बीत गया

आगे चलना है जीवन पथ पर

आओ, हम तुम साथ चलें...... .


हर लम्हा हर पल जो पीछे बीता

उससे बेहतर हर रात कटें

तेरे हाथों में हाथ धरें

हर दिन की हम शुरुआत करें

हम न विगत पल कों देखें

आगे भी लंबे साल पड़े 


आओ हमतुम साथ चलें .......


शायद पीछे कुछ कांटें हों

आगे का पथ तो फूलों सा है

पीछे क्रंदन कुछ शोर भी था

आगे हम ,तुम, तन्हाई है

खट्टी मीठी तकरार सही

उनमें अनुभव का सार तो है


 आओ हमतुम साथ चलें .......


अब दृग नयनों पर शीशा है

पर प्यार वही छन कर आता

मीठी ,थकती ,धीमी बातें

आकार हौले से समझाता

पीछे था पल पीछे छूट गया

चलना है स्वर्णिम पथ पर आगे


आओ हमतुम साथ चलें .......
प्रथम रात्रि की रक्तिम आभा 

क्या कर मैं बिसरा पाता हूँ 

मुखरे की स्नेह लकीरों में

मैं सदा वही क्षण पाता हूँ 

तू हाथ बढा मैं मन थामूं 

ये साँस,शरीर सब मिथ्या है

बांधे मुठ्ठी अजर मन कों 

आओ हमतुम साथ चलें .........

चमकी है चाँदी बालों में

कुछ स्वर्ण लकीरें चेहरें पर

पर तेरे नयनों में मैं वैसी

जैसे तुम मेरी आँखों में 

बीते सालों में क्या कुछ फर्क पड़ा

सब कुछ तो वैसा ही है

:)(:


तब भी हमतुम दो ही थे

आज भी हमतुम दो ही हैं

हो काश !

दो साथ चले चल जाएंगें 


आओ हमतुम साथ चलें .......
आओ हमतुम साथ चलें .......





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