जिंदगी तेरी रफ्तार में कहाँ अब मेरे कदम चलते हैं,
अब ठहर लूं तो सुकून मिल जाये
थोड़ा थम के अपनी साँसों से
गुफ़्तगू कर लूं,
ना जाने कब कहाँ ये जालिम मुझसे किनारा कर ले
फिर ना रह जाए मलाल
तुझको टोका ही नही,
दो घड़ी रुक के तेरे आगोश सोयी भी कहाँ ।
क्या करूँ जालिम तुमने ही भगाया हर पल,
तुझको थामु कैसे
तू हर पल मुझसे आगे निकल जाती है।।
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