Monday, September 24, 2018

39.तुम भी क्या जिंदगी

ना इतने जख्म दे जिंदगी

की तेरे दर्द में भी मजा आने लगे,

फिर तेरी पोटली में बंधी खुशियां भी

तूझको मुँह चिढ़ाने लगे ।

चूक जायेगी तेरी अजमाइशें,

जब तेरी जिल्लत में भी मजा आएगा ।

अपनी करनी पर खुद पशेमान होकर,

मेरी फुरकत का फ़तवा तू मुझे सुनाएगा ।

ये सज़ा थी या  जश्ने इनाम मेरे लिए ,

ये सोच सोच के फुर्सत में तू पछतायेगा ।।

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