ना इतने जख्म दे जिंदगी
की तेरे दर्द में भी मजा आने लगे,
फिर तेरी पोटली में बंधी खुशियां भी
तूझको मुँह चिढ़ाने लगे ।
चूक जायेगी तेरी अजमाइशें,
जब तेरी जिल्लत में भी मजा आएगा ।
अपनी करनी पर खुद पशेमान होकर,
मेरी फुरकत का फ़तवा तू मुझे सुनाएगा ।
ये सज़ा थी या जश्ने इनाम मेरे लिए ,
ये सोच सोच के फुर्सत में तू पछतायेगा ।।
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