ये मेरा अंतर्मन
क्यो आज ये मुझसे पूछ रहा है
क्यो आज ये मुझसे पूछ रहा है
क्यो बैठे गुमसुम से तुम हो
उठो ,आज फिर चलना है
उठो ,आज फिर चलना है
ये मेरा...
पथ जो पीछे छूट चुका था
स्वर्णिम था ,अब क्या करना है
फूल बिछे थे जिन रस्तों पर
अब कलियों को क्यो चुनना हैं
ये मेरा ...
ये मेरा ...
क्या रिश्तें थे क्या थे नातें
सब कुछ लगते आज पराये
सब कुछ लगते आज पराये
आज चलो फिर नए सिरे से
नव नूतन एक जहां बसाये
ये मेरा...
जग जीवन का सत्य यही है
जब तुम खुश हो, जहाँ खुशी है
जब तुम खुश हो, जहाँ खुशी है
बहतें आसूँ का मोल कहाँ अब
अपने मन को तुम खुद समझाओ
अपने मन को तुम खुद समझाओ
ये मेरा...
जीवन की घड़ियाँ अब कम हैं
क्यो रोते हो तुम उठ जाओ
अपनी खुशियो को भर मुठ्ठी में
जीवन पथ पर दौड़ लगाओ
जीवन पथ पर दौड़ लगाओ
ये मेरा अंतर्मन
क्यो आज ये मुझसे पूछ रहा है
क्यो बैठे गुमसुम से तुम हो
उठो ,आज फिर चलना है
ये मेरा...
ये मेरा...
No comments:
Post a Comment